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बीजेपी ने तोड़ा रिश्ता तो महबूबा मुफ़्ती ने किया खुलासा, तो बीजेपी की इस चाह की वजह से ही टूटा गठबंधन?

जम्मू-कश्मीर में पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच गठबंधन मात्र 3 साल में ही टूट गया. भाजपा ने समर्थन वापसी की चिट्ठी राज्यपाल को सौंपी और राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की है. भाजपा-पीडीपी गठबंधन के टूटने के पीछे की वजह भी अब सामने आ गई है. इसका खुलासा खुद महबूबा मुफ़्ती ने ही किया है. गठबंधन टूटने के पीछे का कारण जानकर आप भी हैरान रह जाओगे. आखिरकार भाजपा में अपनी एक नीति के पीछे एक राज्य की सत्ता को यूँही ठोकर मार दी.

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पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी जम्मू-कश्मीर में सख्ती की नीतियाँ लागू करने की बात करने लगी. उन्होंने कहा कि ऐसी नीति राज्य में नहीं चलेगी. इसी के साथ महबूबा ने कहा कि दोनों पार्टियां अलग-अलग विचारधारा को मानती हैं, लेकिन फिर भी बड़े विजन को साथ लेकर BJP के साथ गठबंधन किया गया था.

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महबूबा मुफ़्ती ने अपने बयान से साफ़ कर दिया कि वह राज्य में आए दिन हो रही घटनाओं पर सख्ती नहीं दिखाएंगी वहीं भाजपा सख्ती को लेकर डटी रही और इसका अंत गठबंधन के टूटने के साथ हुआ. भाजपा घाटी में जो हालात बन रहे हैं उनका समाधान निकालना चाहती थी इसी के चलते भाजपा ने सख्ती का रास्ता अपनाने की बात कही लेकिन महबूबा नरमी की बात कहती रहीं.

 

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भाजपा ने राज्य के विकास के लिए गठबंधन चलाने की बहुत कोशिश की लेकिन शायद पीडीपी ऐसा नहीं चाहती थी. कोई भी दल झुकने को तैयार नहीं था और इसी के चलते भाजपा ने सत्ता से दूर रहने का फैसला किया. बता दें कि 3 साल से पीडीपी-भाजपा गठबंधन था. भाजपा महासचिव राम माधव ने पीडीपी से समर्थन वापस लेने की घोषणा की. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मंगलवार, 19 जून को दिल्ली में राज्य के सभी बड़े पार्टी नेताओं के साथ मीटिंग की, जिसके बाद सहमति बनी और समर्थन वापस लेने का फैसला किया गया.

 

भाजपा के इस फैसले के बाद मंगलवार की शाम ही जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अपने पद से इस्तीफा दे देंगी. बताया जा रहा है कि बीजेपी कुछ ही देर में राज्यपाल को अपना पत्र देगी.

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक अमित शाह राज्य में गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्री द्वारा आक्रामक कार्रवाई शुरू करने से पहले जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल में शामिल पार्टी के सभी मंत्रियों से राय-मसुविरा करना चाहते हैं. इस बैठक से पहले अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के साथ बैठक भी की.

 

वहीँ कुछ जानकारों का मानना है कि बैठक में अमित शाह पार्टी के मंत्रियों से यह जानना चाहते है कि अगर हालात में सुधार होने की गुंजाइश बनती हो तो क्या जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू कर दिया जाए. आपको बता दें  कि पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर में सीजफायर करने के बावजूद आतंकी हमलों में कमी न आने और वरिष्ठ पत्रकार की हत्या से प्रदेश के हालात और भी जटिल हो गए.

महबूबा ने अपना इस्तीफ़ा देकर सही फैसला किया या गलत. इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रया आप कमेंट कर दे सकते हैं. 

 

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